नेपाल की उम्मीद -बालेन्द्र शाह

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस बना कॉरपोरेट ग्रोथ का इंजन।
अपने राजतंत्र के लिये सारी दुनिया मशहूर नेपाल में इन दिनों गहमागहमी है। कारण है वहाँ का एक युवा नेता, जो कुछ ही सालों में इतनी लोकप्रियता बटोरी कि नेपाल की जनता ने उसे अपने सिर -आँखों पर बिठा लिया और भारी मतों से प्रधानमंत्री पद के लिये चयनित कर लिया, नाम है बालेन्द्र शाह ।
बालेन्द्र शाह की जीवनी
बालेन्द्र शाह उर्फ़ बालेन का जन्म काठमांडू के नरदेवी में 27 अप्रैल 1990 में हुआ था।बालेन के पिता राम नारायण शाह आयुर्वेद के डॉक्टर हैं और इनकी माँ का नाम ध्रुवदेवी शाह है। बालेन बचपन से संगीतप्रेमी थे और टोपियों के शौकीन थे। इनकी पहचान स्ट्रक्चरल इंजीनियर, रैपर, एक्टर, म्यूजिक प्रॉड्यूसर, गीतकार और एक कवि की रही है। बालेन शाह ने सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई काठमांडू के व्हाइट हाउस इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से की है और मास्टर्स की डिग्री स्ट्रक्चरल इंजीनियरिंग में कर्नाटक के विश्वेश्वरैया नेशनल इंस्टट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से ली है। बालेन शाह की पत्नी का नाम सबिना काफ्ले है। इनकी लव स्टोरी किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है। इनका अफेयर कविताओं से शुरू हुआ और दाम्पत्य सूत्र में के धागे में दोनों बंध गए। सबिना नेपाल के मोरंग जिले के उरलाबारी की रहने वाली और लेखिका हैं। सबिना ने नोबल कॉलेज से पब्लिक हेल्थ में ग्रेजुएशन किया और दीपलता नामक एक उपन्यास भी लिखा है। यही नहीं वह सोशल मीडिया पर प्रेम कविताएं भी लिखती है , और इनकी कविताओं का ही जादू है कि बालेन शाह इनको अपना दिल बैठे। बालेन शाह का इश्क़नामा कविताओं से शुरू हुआ तो ये ग़लत नहीं होगा।फरवरी 2018 में दोनों परिणय सूत्र में बंध गए और 2023 में इनकी बेटी भी हुई जिसका नाम है श्रद्धा शाह।
बालेन कॉलेज में पढ़ाई के दौरान भी छात्र राजनीति को लेकर सक्रिय रहे थे, पर चुनावी राजनीति का आग़ाज़ इन्होंने 2022 में नेपाल के स्थानीय चुनाव से किया था। लेकिन वो मधेशी समुदाय से और भारत के लिये वो सकरात्मक सोच नहीं रखते। अपने सोशल मिडिया के कुछ पोस्ट में उन्होंने भारत के बारे में अनर्गल बात कही थी जो एक अशोभनीय थी पर हैरत की बात है शोसल मिडिया से वो पोस्ट गायब है।
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आख़िर क्या कारण है बालेन्द्र शाह पर लोग इतना भरोसा कर रहे हैं?
शाह को नेपाल के लोग आकर्षक व्यक्तित्व और एक नवीन सोच जिसके अंदर नेपाल को विकसित करने की पूरी क्षमता उन्हें नज़र आती है।
वह गायक रहे हैं, काम से ज्यादा नहीं, पर फ़र्क यह है कि वह सत्ता के ख़िलाफ़ बोलते हैं, ये जनता के दिल में जगह बनाने का अहम कारण है।
जैसे सभी को याद होगा शाह ने कहा था -" सिंह दरबार में आग लगा देंगे।" किसी भी वरिष्ठ नेता ऐसा बोलने में दस बार सोचेगा। पर शाह जी को ज़रा सी भी हिजक ना हुई। ऐसी भड़काऊ भाषा और इस तरह के व्यक्तित्व से परेशान भीड़ जल्दी आकर्षित होती है। "
महज़ पैंतिस वर्ष की आयु में नेपाल की राजनीति में अहम चेहरा कैसे बने बालेन्द्र शाह?
नेपाल में दशकों से राज्य कर रहे सारे वरिष्ठ नेताओं को बुरी तरह से पछाड़ कर आगे बढ़ गए बालेन्द्र शाह क्योंकि नेपाल को उनसे बहुत उम्मीद है । शायद इसलिए भारी बहुमत मिली है उनकी पार्टी को। बुरी तरह से पुराने दलों को हराते बालेन्द्र शाह का अब नेपाल पर वर्चस्व होगा। आखिर क्यों ना हो आज की नई पीढ़ी के लोकप्रिय नेता के साथ वो हरेक नेपाली की आख़री उम्मीद जो हैं। बालेंद्र शाह, हाल में नेपाल में हुए Gen-Z प्रदर्शन के बाद ज्यादा चर्चाओं में आए। राजनीतिक कैरियर कोई ज्यादा लंबा नहीं है। बालेंद्र शाह, हाल में नेपाल में हुए Gen-Z प्रदर्शन के बाद ज्यादा चर्चाओं में आएं ।
बालेन्द्र शाह की ऐतिहासिक जीत का ब्योरा -
रैपर से राजनेता बने बालेंद्र शाह की राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP) ने आम चुनावों में प्रचंड जीत हासिल की। इस ऐतिहासिक नतीजे के साथ ही बालेन्द्र शाह ने चार बार नेपाल के प्रधानमंत्री रहे के.पी. ओली को करारी शिकस्त दे दी है।
बालेंद्र शाह का मुकाबला झापा-5 निर्वाचन क्षेत्र में नेपाल की पुरानी पार्टी CPN-UML के अध्यक्ष और पूर्व प्रधानमंत्री के.पी. शर्मा ओली से था. अब चुनावी नतीजों ने नेपाल की पुरानी राजनीतिक पार्टियों के वर्चस्व को पूरी तरह खत्म कर दिया है।
बालेन ने ओली को यहां लगभग 50,000 वोटों के भारी अंतर से हरा दिया है. निर्वाचन आयोग के मुताबिक, बालेन्द्र को 68,348 वोट मिले, जबकि ओली महज 18,734 वोट ही हासिल कर पाए।
दिग्गज नेताओं को पछाड़ कर शाह का विजयी होने का मुख्य कारण?
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इतनी कम उम्र बालेन्द्र शाह ने वो कर दिखाया जो बड़े- बड़े वरिष्ठ नेताओं के लिए लोहे के चने चबाने जैसा है।
आठ सितंबर, 2025 नेपाल के इतिहास में लिखें जाने वाला सबसे काला दिन, जिसने ऐसी कई मासूम जानें ले लीं, जो ठीक से खिले भी न थें! उन बच्चों का कसूर क्या था?
यही न की उन्होंने अपने हक़ के लिए आवाज उठाई थी?
पर! क्यों सरकार ने उनकी एक बात न सुनी और न ही कोई जवाब दिया और सरेआम उनके सीने पर गोली दाग दी! ये कैसी बर्बरता थी ?
शायद उसी आक्रोश का नतीजा है कि करोड़ो नेपाली जनता
आज युगों से शासन कर रही पार्टियों से अब ऊब चुंकि है, कई बार उम्मीद टूटी है पर कही न कही एक आश की चिंगारी हरेक नेपाली दिलों में बची है।
उस आश के दीपक का नाम है विश्व चर्चित युवा नेता बालेन्द्र शाह।
वो सुबह कभी तो आयेगी
इन काली सदियों के सर से,
जब रात का आंचल ढलकेगा
जब अम्बर झूम के नाचेगा, जब धरती नग़मे गाएगी
वो सुबह कभी तो आयेगी ...
ये सपना आज हरेक नेपाली खुली अपने प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह के कारण खुली आँखों से देख रहा है। पर देखते हैं बालेन्द्र शाह जी अपनी जनता के उम्मीदों पर कितने खड़े उतरते हैं।
पूजा' बहार ' (नेपाल)
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