बुराड़ी में बिहार दिवस का भव्य उत्सव, संस्कृति और सुरों ने बांधा समां

बुराड़ी में बिहार दिवस का भव्य उत्सव, संस्कृति और सुरों ने बांधा समां

राजधानी दिल्ली का बुराड़ी इलाका उस समय पूरी तरह बिहार के रंग में रंग गया, जब बिहार दिवस 2026 के उपलक्ष्य में एक भव्य और सांस्कृतिक आयोजन का आयोजन किया गया।अपनी जन्मभूमि से दूर रह रहे लोगों ने ‘कर्मभूमि’ में ‘जन्मभूमि’ का उत्सव मनाते हुए अपनी परंपराओं, लोकगीतों और सांस्कृतिक विरासत को पूरे उत्साह के साथ जीवंत कर दिया। कार्यक्रम में उमड़ा जनसैलाब इस बात का प्रमाण था कि बिहार की मिट्टी से जुड़ाव आज भी लोगों के दिलों में उतनी ही गहराई से बसा हुआ है।

इस भव्य आयोजन का संचालन अखंड भारत मिथिला महान संस्था द्वारा किया गया, जिसमें समाज के विभिन्न वर्गों के लोगों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। कार्यक्रम में दरभंगा से सांसद गोपाल जी ठाकुर और उत्तर-पूर्वी दिल्ली के सांसद मनोज तिवारी विशेष रूप से मौजूद रहे।

कार्यक्रम की अध्यक्षता संजीव चौधरी ने की, जबकि महामंत्री मनोज मिश्रा ने आयोजन को सफल बनाने में अहम भूमिका निभाई।

कार्यक्रम में सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने सभी का दिल जीत लिया। नन्हे कलाकार आरोही, आराधिका, सानवी और समृद्धि ने अपनी शानदार प्रस्तुतियों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। उनकी कला में बिहार की लोक परंपरा की झलक साफ नजर आई, जिसे देखकर मंच पर मौजूद अतिथियों सहित दर्शक भावुक और उत्साहित हो उठे।

वहीं बिहार से आए मैथिल कलाकारों में मुख्यतः कुंज बिहारी मिश्र, प्रिया मलिक, विकास झा और जूली झा सहित अन्य कलाकारों ने अपने मधुर गायन से पूरे माहौल को संगीतमय बना दिया। उनके लोकगीतों ने लोगों को अपनी जड़ों से जोड़ते हुए बिहार की सांस्कृतिक खुशबू को पूरे पंडाल में फैला दिया। आयोजन समित के पदाधिकारियों ने मधुबनी निवासी सिविल सेवा परिक्षा पास करने वाले शिवम नारायण झा को भी सम्मानित किया और कहा कि बिहार की माटी से सिर्फ कलाकार ही नहीं देशभर में सेवा देने वाले अधिकारी भी आते हैं जिन्होंने अपनी बिहार की माटी का मान बढ़ाया है। कार्यक्रम के दौरान जब सांसद मनोज तिवारी ने दर्शकों की मांग पर मंच से लोकगीत गाना शुरू किया, तो पूरा पंडाल तालियों और उत्साह से गूंज उठा। हर कोई उनके गीतों पर झूमता नजर आया, जिससे माहौल पूरी तरह उत्सवमय हो गया। अपने संबोधन में मनोज तिवारी ने कहा कि ऐसे आयोजन बच्चों की प्रतिभा को निखारने और उन्हें अपनी संस्कृति से जोड़ने का सशक्त माध्यम हैं। आयोजकों ने भी यह संकल्प लिया कि हर वर्ष इसी तरह भव्य रूप से बिहार दिवस का आयोजन किया जाएगा, ताकि आने वाली पीढ़ी अपनी जड़ों और परंपराओं से जुड़ी रहे। यह आयोजन केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि अपनी पहचान, संस्कृति और एकता का जीवंत उत्सव बनकर सामने आया।








Comments

स्वतंत्र हिंदी समाचार मंच

कंपनी

संपादक मंडल

ब्यूरो प्रमुख

करियर

खबरें

राज्य समाचार

राजनीति

अपराध

अंतर्राष्ट्रीय

पत्रिका

वर्तमान अंक

पुराने अंक

सदस्यता

ई-पेपर

विज्ञापन

विज्ञापन दरें

मीडिया किट

विज्ञापन बुक करें

प्रायोजित कंटेंट

© 2025 लोकतंत्र की बुनियाद | RNI: DELHIN/2013/50765│

गोपनीयता नीति

नियम व शर्तें

शिकायत निवारण

साइटमैप