60 साल की साधना और सेवा का गौरव — हीरक जयंती उत्सव

60 साल की साधना और सेवा का गौरव — हीरक जयंती उत्सव
भारतीय संस्कृति की आत्मा में बसे योग के इस पावन प्रवाह ने जब 60 वर्षों की गौरवशाली यात्रा पूरी की, तो यह केवल एक संस्थान का उत्सव नहीं, बल्कि साधना, समर्पण और सेवा की अद्भुत परंपरा का उत्सव बन गया। इसी भावना के साथ भारतीय योग संस्थान की हीरक जयंती समारोह का आयोजन अत्यंत उत्साह और भव्यता के साथ संपन्न हुआ।
इस विशेष अवसर पर संस्थान के जिला प्रशांत विहार के डिस्ट्रिक्ट पार्क केंद्र पूरी तरह उत्सव के रंग में रंगा नजर आया, जहां योग, संस्कृति और परंपरा का अद्भुत संगम देखने को मिला।

कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ दीप प्रज्वलन से हुई, जिसके बाद विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का आयोजन किया गया। साधकों और साधिकाओं ने अपने सुरों और अभिव्यक्तियों के माध्यम से वातावरण को भावपूर्ण बना दिया। प्रस्तुत किए गए गीतों और कार्यक्रमों में भारतीय संस्कृति, योग साधना और आध्यात्मिकता की गहरी छाप स्पष्ट रूप से देखने को मिली।
इस दौरान संस्थान के वरिष्ठ सदस्यों और पदाधिकारियों ने अपने संबोधन में संस्थान की 60 वर्षों की गौरवशाली यात्रा को विस्तार से साझा किया। उन्होंने बताया कि कैसे संस्थान ने समय-समय पर समाज में योग के महत्व को स्थापित करने, लोगों को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करने और मानसिक व शारीरिक संतुलन बनाए रखने में अहम भूमिका निभाई है।

समारोह में बड़ी संख्या में योग साधकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों की भागीदारी देखने को मिली। कार्यक्रम के दौरान संस्थान से जुड़े वरिष्ठ साधकों को उनके योगदान के लिए सम्मानित भी किया गया, जिससे माहौल और अधिक गरिमामय हो गया।
इस मौके पर मुख्य अतिथि के रूप में सतेंद्र कुमार सिंह उपस्थित रहे। साथ ही जिला संरक्षक राजकुमार जैन, जिला प्रधान रवि बंसल, जिला मंत्री रवि तनेजा, अशोक पुरी, केंद्र प्रमुख दक्षा दावड़ा, रामअवतार अग्रवाल, नरेश खुराना सहित काफी संख्या में पदाधिकारीगण व साधक उपस्थित रहे।
हीरक जयंती के इस अवसर ने न केवल संस्थान की उपलब्धियों को याद करने का अवसर दिया, बल्कि आने वाले समय में योग और समाजसेवा के क्षेत्र में और अधिक सक्रिय भूमिका निभाने का संकल्प भी दोहराया गया।
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