रेप-पीड़िता का नाम पोर्न साइट पर ‘ट्रेंडिंग’, कहाँ जा रहा है समाज?

कहते हैं कि अगर आपका शरीर बीमार हो तो उसे कुछ समय में ठीक किया जा सकता है लेकिन अगर आपका दिमाग बीमार हो गया हो तो उसे ठीक करने में बहुत ज्यादा समय लगता है या फिर कभी -कभी ठीक ही नहीं किया जा सकता है।

ऐसा ही कुछ इस समय हमारे देश का माहौल हो चुका है, जहां रोज नए – नए और दरिंदगी की चरम सीमा को पार करने वाले रेप के केस सुनने को मिल रहे हैं। कहीं 6 महीने की बच्ची, तो कहीं 60 साल की वृद्ध तक को नहीं छोड़ा जा रहा है। ऐसे में युवतियों के बारे में क्या कहा जाए!

हाल ही में हैदराबाद की एक 25 साल की डॉक्टर प्रियंका रेड्डी के साथ जो दरिंदगी का खेल खेला गया वो अभी तक लोगों के जेहन में खौल रहा है। जैसे कि हर बड़ी रेप घटना के बाद लोग सड़कों पर जुलूस निकालते हैं, संसद में हंगामा करते हैं, मोमबत्ती मार्च करते हैं, सोशल मीडिया साइट पर चीजें ट्रेंड करने लग जाती हैं, प्रियंका  के मामले में भी ऐसा ही कुछ पिछले दिनों से जारी है।

इन सबके बीच एक बेहद निराशाजनक सूचना सुनने को मिली कि भयानक दुर्दशा सहने वाली मृतक प्रियंका का नाम किसी पोर्न साईट पर टॉप ट्रेंड कर रहा था।
अब इसे मानसिक दिवालियापन नहीं तो फिर क्या कहा जाए?

जहां एक बेटी अपनी जान गंवा देती है और उसके परिजन अभी ठीक से सम्भल भी नहीं पाए हैं, वही लोग उस बेटी का नाम पोर्न साइट पर खोज रहे हैं। चलो माना किसी सिरफिरे ने डाल दिया लेकिन उन 8 मिलियन लोगों की दिमागी हालत के बारे में क्या कहा जाये जो अश्लील साईट पर प्रियंका रेड्डी सर्च कर रहे हैं और वह वीडियो क्लिप देखना चाहते हैं जिसमें उसके साथ दरिंदगी की गयी थी।

कितना अजीब है ना!

क्या हम ही वो इंसान हैं जो राम और कृष्ण की धरती पर पैदा हुए हैं। क्या हम उस देश की पैदाईश हैं जहाँ अहिंसा परमो धर्मः सिखाया जाता है। क्या हम उस देश के नागरिक हैं, जहाँ की संस्कृति में बेटी को पूजना सिखाया जाता है।

या फिर हम उस नए भारत के नागरिक हैं जो एक मरी हुई लड़की की रेप की वीडियो क्लिप सर्च कर रहे हैं ताकि देख सकें कि वो अपने अंतिम समय में किस प्रकार संघर्ष कर रही थी, उसको कैसे तड़पाया गया और वो किस प्रकार दर्द बर्दाश्त कर पायी। कहा जा सकता है कि जिस तरीके से रेप जैसी घटनाएं दिन प्रतिदिन विकृत रूप में सामने आती जा रही हैं उन को बढ़ावा देने में कहीं ना कहीं सस्ते इंटरनेट और अश्लीलता परोसने वालों ने बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

जी हां! आज इतनी आसानी से लोगों के हाथ में सस्ते स्मार्टफोन से आ गए हैं उतने ही आसानी से सस्ता डाटा भी उपलब्ध है। ऐसे में यह आंकड़ा चौंकाने वाला है कि मोबाइल इंटरनेट का इस्तेमाल 80 प्रतिशत अश्लील सामग्री को देखने में किया जाता है, जबकि मात्र 20 परसेंट इंटरनेट का इस्तेमाल ज्ञान अर्जित करने से संबंधित चीजों में किया जाता है।

हालाँकि भारत सरकार ने सख्ती दिखाते हुए बहुत सारे पोर्न साइटों को बैन कर दिया है। भारत में फिर भी इस मामले में और अधिक सख्ती की जरुरत है। वहीं सबसे अहम् बात यह है कि सरकार और पुलिस के प्रयास से सिर्फ ये मामले सुधरने होते तो ‘निर्भया केस’ के बाद से ही सुधार दिखते।

लेकिन आंकड़ों पर नजर डालें तो देश में हर 14 मिनट में एक लड़की रेप की शिकार बन रही है।
इसलिए सुधार तभी सम्भव होगा जब हम और आप जागरूक होंगे, अपनी बहन -बेटी के जैसे ही दूसरों के घरों की लड़कियों की सुरक्षा अपनी जिम्मेदारी समझेंगे।

और हाँ! हमको, आपको और सभी को रेप जैसी विकृति के खिलाफ़ लगातार आवाज़ उठानी पड़ेगी, क्योंकि एक आवाज़ ही है, जो बदलाव ला सकती है ।

गणेश यादव, सम्पादक
(लोकतंत्र की बुनियाद, राष्ट्रीय हिंदी पत्रिका)