खंड-दृष्टि से समाज सुखी नहीं हो सकता: डॉ मुरली मनोहर जोशी

कांस्टीट्यूशन क्लब नई दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ मुरली मनोहर जोशी ने तमाम सामाजिक समस्याओं के लिए पश्चिमी सभ्यता की खंड दृष्टि को जिम्मेदार बताते हुए भोगवाद पर अंकुश लगाने की बात कही। अपने संबोधन में विद्वान के तौर पर ख्याति लब्ध डॉ जोशी ने जीडीपी के महिमामंडन पर भी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि जीडीपी का मतलब प्रकृति का दोहन बन गया है, जबकि प्रकृति से हमें सिर्फ पोषण लेना चाहिए और उसकी शोषण की अवधारणा पर कार्य नहीं करना चाहिए।

कार्यक्रम में जूना पीठाधीश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरी जी महाराज ने भी भारतीय दृष्टि पर अपनी राय रखी और स्पष्ट कहा कि निराश होने की कोई वजह नहीं है, क्योंकि लाख अंधेरा हो भारतीय दृष्टि में उसे उजाले की ओर ला सकने की पर्याप्त क्षमता है। अपने आध्यात्मिक अनुभव एवं साधना को बताते हुए स्वामी जी ने भगवान द्वारा देवों को इंद्रियों का दमन, दैत्यों को दया और मनुष्यों को दान करने का आशीर्वाद दिए जाने को विस्तार में बताया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि भारतीय दृष्टि में मनुष्य जीवन दान के बिना पूर्ण नहीं माना जाता है। स्वामी जी ने समूचे संसार को परिवार मारने की अवधारणा ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए निराशा से उबरने को प्राथमिकता देने पर बल दिया।

कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ राष्ट्रीय अधिकारी एवं अर्थशास्त्री के तौर पर ख्याति लब्ध डॉ बजरंग लाल गुप्त की दो किताबों का लोकार्पण किया गया। प्रभात प्रकाशन द्वारा प्रकाशित हिंदू अर्थ चिंतन पर अपने आर्थिक अनुभवों को उन्होंने सम्मिलित किया है।
मंगल विमर्श पत्रिका के प्रधान संपादक डॉ ओमीश परुथी ने कार्यक्रम का संचालन किया।

दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में आयोजित इस अनुशासित कार्यक्रम में विश्व में व्याप्त तमाम नकारात्मकताओं के जिक्र के साथ उसके हल की दिशा में सार्थक चर्चा की गई और वंदे मातरम गान के साथ कार्यक्रम संपन्न हुआ।